अणदीठा-पख

बै पख जका आपां देखतां थकां-ई अणदीठा कर देवां। चालता, भाजता, पड़ता-खड़्या होंवता। अठै तांणी कै जागता-बिसाईं लेंवता इज। कदै कोनी देखां वां कानी समझतां थकां-ई।

एक पड़ाव वां अणदीठा-पखां माथै, के ठा दीठ मांय आज्‍यावै।

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चूरू रै इंद्रमणि पार्क मांय रोजीनै सैंकड़ू मिनख घूमै, बिसाईं लेवै। पण, चित्रकार रामकिशन अडिग पार्क मांय बड़ै तद वां री निजर कीं अणदीठा-पख देखै, इण भांत-

आपां कदे-ई इण पख सूं देख्‍या है आं चितरामां नै ?

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